Thursday, 7 April 2016

NATURAL CURE FOR DIABETES: NATURAL TREATMENT FOR DIABETES: HERBAL TREATMENT FOR DIABETES

NATURAL OR NATUROPATHY TREATMENT FOR DIABETES / DIABETIC PATIENTS: NATURE CURE FOR DIABETESE: BELOW ARE SOME TIPS AND SUGGESTIONS FOR DIABETIC PATIENTS (TYPE 1 or TYPE 2): NATURAL REMEDIES FOR DIABETES: DIABETES NATURAL REMEDIES: What to Eat or Do Not Eat In Diabetes Disease, Dos and Dont's for Diabetic Patients: How To Fight Diabetes Naturally: Natural Method to Fight or Heal Diabetes Mellitus or Diabetes Insipidus: Naturopathy Yoga Treatment for Type 1 Type 2 Diabetes: Herbal or Natural Method(s) To Cure Diabetes Insipidus or Diabetes Mellitus: Natural Remedies and Natural Method to Treat Diabetes, Which Fruit and Vegetables Can be Eaten in Diabetes, Natural Food for Diabetic, Natural and Herbal Food for Diabetes Patients: 

WHICH FRUIT OR VEGETABLE CAN I EAT IN DIABETESE: WHICH FRUIT OR VEGETABLE / HERB IS GOOD IN DIABETES: (WHICH FRUIT AND VEGETABLE IS GOOD IN DIABETES):


  1. BLACKBERRY (JAMUN/Bayas/التوت,Baies): is very good fruit for diabetic patients, it is a magical fruit for diabetes patients, the fruit as well as seed - both are herbal medicine for diabetes patients, 




MEDICINAL USES OF CLOVE : लौंग के औषधीय प्रयोग

(Medicinal Use of Clove) लौंग के औषधीय प्रयोग:

चाहे भोजन का जायका बढ़ाना हो या फिर दर्द से छुटकारा, छोटी सी लौंग को न सिर्फ अलग-अलग तरीकों से इस्तेमाल किया जा सकता है बल्कि इसके फायदे भी अनेक हैं। साधारण से सर्दी-जुकाम से लेकर कैंसर जैसे गंभीर रोग के उपचार में लौंग का इस्तेमाल किया जाता है। इसके गुण कुछ ऐसे हैं कि न सिर्फ आयुर्वेद बल्कि होम्योपैथ व एलोपैथ जैसी चिकित्सा विधाओं में भी बहुत अधिक महत्व आंका जाता है।



भोजन में फायदेमंद
मसाले के रूप में लौंग का इस्तेमाल शरीर के लिए बहुत फायदेमंद है। इसमें प्रोटीम, आयरन, कार्बोहाइड्रेट्स, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, सोडियम और हाइड्रोक्लोरिक एसिड भरपूर मात्रा में मिलते हैं। इसमें विटामिन ए और सी, मैग्नीज और फाइबर भी पाया जाता है।
दर्दनाशक गुण
लौंग एक बेहतरीन नैचुरल पेनकिलर है। इसमें मौजूद यूजेनॉल ऑयल दांतों के दर्द से आराम दिलाने में बहुत लाभदायक है। दांतो में कितना भी दर्द क्यों न हो, लौंग के तेल को उनपर लगाने से दर्द छूमंतर हो जाता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल विशेषता होती है जिस वजह से अब इसका इस्तेमाल कई तरह के टूथपेस्ट, माउथवाश और क्रीम बनाने में किया जाता है।
गठिया में आराम
गठिया रोग में जोड़ों में होने वाले दर्द व सूजन से आराम के लिए भी लौंग बहुत फायदेमंद है। इसमें फ्लेवोनॉयड्स अधिक मात्रा में पाया जाता है। कई अरोमा एक्सपर्ट गठिया के उपचार के लिए लौंग के तेल की मालिश को तवज्जो देते हैं।
श्वास संबंधी रोगों में आराम
लौंग के तेल का अरोमा इतना सशक्त होता है कि इसे सूंघने से जुकाम, कफ, दमा, ब्रोंकाइटिस, साइनसाइटिस आदि समस्याओं में तुरंत आराम मिल जाता है।
बेहतरीन एंटीसेप्टिक
लौं व इसके तेल में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जिससे फंगल संक्रमण, कटने, जलने, घाव हो जाने या त्वचा संबंधी अन्य समस्याओं के उपचार में इसका इस्तेमाल किया जाता है। लौंग के तेल को कभी भी सीधे त्वचा पर न लगाकर किसी तेल में मिलाकर लगाना चाहिए।
पाचन में फायदेमंद
भोजन में लौंग का इस्तेमाल कई पाचन संबंधी समस्याओं में आराम पहुंचाता है। इसमें मौजूद तत्व अपच, उल्टी गैस्ट्रिक, डायरिया आदि समस्याओं से आराम दिलाने में मददगार हैं।
कैंसर
शोधकर्ताओं का मानना है कि लौंग के इस्तेमाल से फेफड़े के कैंसर और त्वचा के कैंसर को रोकने में काफी मदद मिल सकती है। इसमें मौजूद युजेनॉल नामक तत्व इस दिशा में काफी सहायक है।
लौंग में कार्बोहाइड्रेट, नमी, प्रोटीन, वाष्पशील तेल, वसा जैसे तत्वों से भरपूर होता है। इसके अलावा लौंग में खनिज पदार्थ, हाइड्रोक्लोरिक एसिड में न घुलने वाली राख, कैल्शियम
, फास्फोरस, लोहा, सोडियम, पोटेशियम, विटामिन सी और ए भी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं तीखी लोंग के ऐसे ही कुछ प्रयोग जो आपके लिए लाभदायक सिद्ध हो सकते हैं।
- खाना खाने के बाद 1-1 लौंग सुबह-शाम खाने से एसीडिटी ठीक हो जाती है।
-15 ग्राम हरे आंवलों का रस, पांच पिसी हुई लौंग, एक चम्मच शहद और एक चम्मच चीनी मिलाकर रोगी को पिलाएं इससे एसीडिटी ठीक हो जाता है।
- लौंग को गरम कर जल में घिसकर माथे पर लगाने से सिर दर्द गायब हो जाता है।
- लौंग को पीसकर एक चम्मच शक्कर में थोड़ा-सा पानी मिलाकर उबाल लें व ठंडा कर लें। इसे पीने से उल्टी होना व जी मिचलाना बंद हो जाता है।
- लौंग सेंककर मुंह में रखने से गले की सूजन व सूखे कफ का नाश होता है।
- सिर दर्द, दांत दर्द व गठिया में लौंग के तेल का लेप करने से शीघ्र लाभ मिलता है।
- गर्भवती स्त्री को अगर ज्यादा उल्टियां हो रही हों तो लौंग का चूर्ण शहद के साथ चटाने से लाभ होता है।
- लौंग का तेल मिश्री पर डालकर सेवन करने से पेटदर्द में लाभ होता है।
- एक लौंग पीस कर गर्म पानी से फांक लें। इस तरह तीन बार लेने से सामान्य बुखार दूर हो जाएगा।
- लौंग दमा रोगियों के लिए विशेषरूप से लाभदायक है। लौंग नेत्रों के लिए हितकारी, क्षय रोग का नाश करने वाली है।
- लौंग और हल्दी पीस कर लगाने से नासूर मिटता है।
- चार लौंग पीस कर पानी में घोल कर पिलाने से बुखार ठीक हो जाती है।

Natural Cure for Dental Problems : Naturopathy for Dental Disease : दांतों की बीमारी का प्राकृतिक उपचार

दांतों की बीमारी का उपचार : 

-10 सेंधा नमक बारीक पीसकर कपड़-छान कर लें। उसमें से दो ग्राम नमक हथेली पर रखकर चार गुना सरसों का तेल डालकर मिश्रण तैयार करें। बाद में नमक तेल के मिश्रण से अंगुली द्वारा दांत एवं मसूड़ों की रोजाना सुबह हल्की मालिश करें तथा बाद में सादे या गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें। इससे दांतों का ठंडा, गर्म और खट्टा लगना समाप्त हो जाता है। 
-आंवला जलाकर सरसों के तेल में मिलाएं

इसे मसूड़ों पर धीरे-धीरे मलें
- नीम की पत्तियां, काली मिर्च और काला नमक मिलाकर पीस ले
इसका नियमित सेवन करें
- खस, इलायची और लौंग का तेल मिलाकर मसूड़ों में लगाएं
- जीरा, सेंधा नमक, हरड़, दालचीनी, दक्षिणी सुपारी को समान मात्रा में लें
इसे बंद बर्तन में जलाकर पीस लें इस मंजन का नियमित प्रयोग करें
- फिटकरी और काला नमक बारीक पीसकर दांतों पर मलें।
-कीड़ा लगने से बचने का सबसे सही तरीका है कि रात को ब्रश करके सोएं। मीठी और स्टार्च आदि की चीजें कम खाएं और बार - बार न खाएं। मीठी चीजें खाने के बाद कुल्ला करें या ब्रश करें। दांतों की अच्छी तरह सफाई करें।
-नीम का दातुन करने से पहले उसे अच्छी तरह चबाते रहें। जब दातुन का अगला हिस्सा नरम हो जाए तो फिर उसमें दांत धीरे - धीरे साफ करें।
- लहसुन बैक्टीरिया को मारने के लिए एक प्राकृतिक हथियार है। कच्चे लहसुन का रस संक्रमण को मारने में मदद करता है। यदि वास्तव में आपके दांत में बहुत अधिक दर्द हो रहा हो तो आप ऐसा कर सकते हैं। कच्चे लहसुन की एक कली लें। इसे पीसें और निचोड़ें तथा इसका रस निकालें। इस रस को प्रभावित क्षेत्र पर लगायें। यह घरेलू उपचार दांत के दर्द में जादू की तरह काम करता है।
-एक टेबलस्पून नारियल का तेल लें और इसे अपने मुंह में चलायें। इसे निगले नहीं, इसे लगभग 30 मिनिट तक अपने मुंह में रखें रहें। फिर इसे थूक दें और मुंह धो लें। आपको निश्चित रूप से आराम मिलेगा।
-दांत के दर्द में पेपरमिंट आईल जादू की तरह काम करता है। अपनी उँगलियों के पोरों पर कुछ तेल लें तथा इसे धीरे धीरे प्रभावित क्षेत्र पर मलें। आपको दांत के दर्द से तुरंत आराम मिलेगा।
-. टी बैग टी बैग एक अन्य घरेलू उपचार है। हर्बल टी बैग को प्रभावित क्षेत्र पर लगायें। इससे पस के कारण होने वाले दर्द से आपको तुरंत आराम मिलेगा।
-ओरेगानो आईल में एंटी बैक्टीरियल, एंटी फंगल, एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी वाइरल गुणधर्म होते हैं। यह घरेलू उपचार में बहुत प्रभावकारी होता है विशेष रूप से दांतों और मसूड़ों की बीमारियों में।
-दांतों में पस होने पर ऐप्पल सीडर विनेगर एक अन्य प्रभावशाली उपचार है। चाहे वह प्राकृतिक हो या ऑर्गेनिक, यह बहुत अधिक प्रभावशाली है। एक टेबलस्पून ए सी वी लें। इसे कुछ समय के लिए अपने मुंह में रखें और फिर इसे थूक दें। इसे निगलें नहीं। इससे प्रभावित क्षेत्र रोगाणुओं से मुक्त हो जाएगा। इससे सूजन भी कम होती है।

दिल की धड़कन तेज होना : NATURE CURE FOR IRREGULAR HEART BEATS

दिल की धड़कन तेज होना (Nature Cure for Irregular Heart Beats)


थोड़ा सा भी परिश्रम करने पर, तेज चलने पर, उठने-बैठने पर या इसी प्रकार के अन्य कार्य करने पर दिल की धड़कन असामान्य हो जाती है।

दिल की धड़कन असामान्य होना दिल की कमजोरी का प्रतीक होता है। इससे रक्त संचार भी बढ़ जाता है और घबराहट सी लगने लगती है। इसका घर पर सामान्य इलाज इस प्रकार किया जा सकता है-

  • 10 ग्राम अनार के पत्ते लेकर 10 ग्राम पानी में डालकर हल्की आँच पर उबालें। यह काढ़ा सुबह-शाम प्रतिदिन पीने से दिल मजबूत बनता है और दिल की धड़कन सामान्य होती है।.
  • गाजर के 200 ग्राम ताजे रस में 100 ग्राम पालक का रस मिलाकर सुबह-सुबह प्रतिदिन पीने से दिल की धड़कन काबू में रहती है, दिल मजबूत रहता है तथा दिल से संबंधित सभी विकार दूर होते हैं।.
  • हृदय रोगी को खूब मथकर मक्खन निकालकर बनाई हुई छाछ एक गिलास प्रतिदिन पिलाई जाए तो हृदय की रक्तवाहिनियों में जमा चर्बी कम हो जाती है तथा दिल की धड़कन व घबराहट दूर होती है।.
  • आलूबुखारा व अनार खाने से भी दिल की बढ़ी हुई धड़कन काबू में होती है।

हल्‍दी वाला दूध पीने का जबरदस्‍त फायदा : BENEFIT OF DRINKING TURMERIC MILK

हल्‍दी वाला दूध पीने का जबरदस्‍त फायदा


हल्दी और दूध के प्राकृतिक प्रतिजैविक गुण होते हैं। इन दो प्राकृतिक अवयवों को अपने दैनिक आहार में सम्मिलित कर आप कई बीमारियों और संक्रमणों को रोक सकते हैं। हल्दी को जब दूध के साथ मिश्रित किया जाता है तो यह कई स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं में फायदेमन्द होता है। यह खतरनाक पर्यावरणीय विष पदार्थों और नुकसानदायक सूक्ष्मजीवों से लड़ने में एक प्रभावशाली उपाय है। हल्‍दी वाले दूध को बनाने कि विधि- एक इन्च हल्दी के टुकड़े को लें। दूध में 15 मिनट के लिये उबालें। दूध से हल्दी को छान लें। दूध को ठंडा करके पियें।

Turmeric Boiled Milk (Specially Cows Milk) has natural antibiotic / antiseptic properties. These two natural ingredients you can include in your daily diet, can prevent many illnesses and infections. Turmeric mixed with the milk is advantageous in many health problems. This is an effective measure in the fight against dangerous substances and harmful microorganisms, environmental toxin. Method of Making Turmeric Treated Milk: 

1. Take a crushed grape size piece of turmeric.
2. Put it in Cows Milk, Boil the milk for 15 minutes. 
3. By cooling down the milk so that it is easy to drink.
4. Drink it till infection goes away.



1- साँस सम्बन्धी बीमारियाँ
हल्दी वाला दूध प्रतिजैविक होने के कारण जीवाणु और विषाणु के संक्रमण पर हमला करता है। इससे श्वास सम्बन्धी बीमारियों के उपचार में लाभ मिलता है, क्योंकि यह मसाला आपके शरीर में गरमाहट लाता है और फेफड़े तथा साइनस में जकड़न से तुरन्त राहत मिलती है। यह अस्थमा और ब्रान्काइटिस के निदान का प्रभावशाली उपचार भी है।
2- कैन्सर
जलन और सूजन कम करने वाले गुणों के कारण यह स्तन, त्वचा, फेफड़े, प्रॉस्ट्रेट और बड़ी आँत के कैन्सर को रोकता है। यह कैन्सर कोशिकाओं से डीएनए को होने वाले नुकसान को रोकता है और कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों को कम करता है।
3- नींद न आना
हल्दी वाला गर्म दूध ट्रिप्टोफैन नामक अमीनोअम्ल बनाता है जो शान्तिपूर्वक और गहरी नींद में सहायक होता है।
4- सर्दी और खाँसी
अपने प्रतिजीवाणु और प्रतिविषाणु गुणों के कारण हल्दी वाले दूध को सर्दी और खाँसी का सर्वश्रेष्ठ उपचार माना जाता है। इससे गले में खराश, सर्दी और खाँसी से तुरन्त राहत मिलती है।
5- गठिया
हल्दी वाले दूध को गठिया के निदान तथा रियूमेटॉइड गठिया के कारण सूजन के उपचार के लिये प्रयोग किया जाता है। यह जोड़ो और पेशियों को लचीला बनाकर दर्द को कम करने में भी सहायक होता है।
6- पीड़ा और दर्द
हल्दी वाले सुनहरे दूध से पीड़ा और दर्द में सबसे बढ़िया राहत मिलती है। यह रीढ़ की हड्डी और शरीर में जोड़ों को मजबूत बनाता है।
7- ऐन्टी-ऑक्सीडन्ट
हल्दी वाला दूध मुक्त रैडिकल्स से लड़ने वाले ऐन्टी-ऑक्सीडेन्ट का बेहतरीन स्रोत है। इससे कई बीमारियाँ ठीक हो सकती हैं।
8- रक्त के शोधक के रूप में
आयुर्वेदिक परम्परा में हल्दी वाले दूध को एक बेहतरीन रक्त शोधक माना गया है। यह शरीर में रक्त परिसंचरण को मजबूत बनाता है। यह रक्त को पतला करने वाला तथा लिम्फ तन्त्र और रक्त वाहिकाओं की गन्दगी को साफ करने वाला होता है।
9- यकृत को विष मुक्त करना
हल्दी वाला दूध प्रकृतिक रूप से यकृत को विषमुक्त करने वाला और रक्त को शोधित करने वाला होता है जो यकृत को मजबूत बनाता है। यह यकृत को सहारा देता है और लिम्फ तन्त्र को साफ करता है।
10- हड्डियों का स्वास्थ्य
हल्दी वाला दूध कैल्शियम का अच्छा स्रोत होता है जोकि हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत रखने के लिये जरूरी होता है। भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेन्दुलकर हड्डियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिये इसे रोज पीते हैं। हल्दी वाले दूध से हड्डियों में नुकसान और ऑस्टियोपोरेसिस में कमी आती है।
11- पाचन सम्बन्धी स्वास्थ्य
यह एक शक्तिशाली ऐन्टी-सेप्टिक होता है और आँत के स्वस्थ बनाने के साथ-साथ पेट के अल्सर और कोलाइटिस का उपचार करता है। इससे पाचन बेहतर होता है और अल्सर, डायरिया और अपच नहीं होता।
12 – माहवारी सम्बन्धी दर्द हल्दी वाला दूध चम्तकारी रूप से कार्य करता है क्योंकि इससे माहवारी में होने वाले दर्द में राहत मिलती है। गर्भवती महिलाओं को इस सुनहरे दूध को आसान प्रसव, प्रसव बाद सुधार, बेहतर दूध उत्पादन और अणडाशय के तेज सिकुड़न के लिये लेना चाहिये।
13- त्वचा का लाल होना
क्लियोपाट्रा कोमल, लचीले और कान्तिमय त्वचा के लिये हल्दी वाले दूध से नहाती थीं। इसी प्रकार कान्तिमय त्वचा के लिये हल्दी वाला दूध पियें। रूइ के फाहे को हल्दी वाले दूध में भिगो कर प्रभावित भाग पर 15 मिनट के लिये लगायें, इससे त्वचा पर लाली और चकत्ते कम होंगें। इससे आपकी त्वचा पर निखार और चमक आयेगी।
14- वजन कम करना
हल्दी वाले दूध से पोषण के वसाओं को नष्ट करने में सहायता मिलती है। यह वजन के नियन्त्रित करने में सहायक होता है।
15- एक्ज़ीमा
एक्ज़ीमा के उपचार के लिये रोजाना एक गिलास हल्दी वाला दूध पियें।

Thursday, 3 September 2015

SOME EASY HOME REMEDIES FOR LOWERING STOMACH BULGED OUT

HOW TO FIGHT FAT ?

Populace of corpulent individuals is expanding at a quick pace. Today there are around 4 crore and 10 lakh individuals in India whose weight is more than ordinary. The majority of the individuals couldn't care less for their expanding weight in beginning stages yet when they turn out to be exceptionally large, and after that they take out their sweat for quite a long time to diminish it. For bringing down heftiness redress of eating practices are vital. Some common items are such which have an extraordinary control on weight. Thus on the off chance that you are not ready to do much diligent work for diminishing weight, you could have make utilization of routines given underneath, these will be entirely helpful in lessening weight.

  1. AVOID SUGAR, OIL, STARCH: Stay away from nourishment items which have more sugars. Sugar, potato and rice contain more starches. They improve our fat.
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  2. WHEAT FLOOR WITH ROUGHAGE & GRAM FLOUR: Rather than just wheat flour chapatti, blend of Soya Bean, Grams and Wheat Flour chapatti is more useful. For this situation (Mix normal wheat flour with 'chana' flour is good practice).
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  3. CABBAGE: Beverage cabbage squeeze day by day. It has characters of decreasing weight and keeps up body digestion system. [you can replace your lunch with cabbage salad mixed with cucumber and other available green salad in your city]. (always eat seasonal salad according to Naturopathy).
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  4. PAPAYA: Eat papaya routinely. It is accessible in all seasons. Utilization of papaya for long time helps in decreasing fat amassed in waist.
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  5. Curd additionally uproots additional fat of body. Buttermilk ought to additionally be tipsy 2-3 times each day.
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  6. Grind Pippala Tree (Ficus Religiosa) leaves and channel it in fabric. Eating 3 gm of this powder day by day morning with Buttermilk will helps in bringing down lump out stomach.
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  7. AMLA (INDIAN GOOSEBERRY): Grind Amla (Myrobalan) and Turmeric in equivalent sum and make their powder. Bring this powder with buttermilk. Waist will turn out to be completely thin.
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  8. CAPSICUM: On the off chance that fat is not under control then, including dark pepper and green crisp in every day diet you can have control over it. It was found in an examination that for bringing fat most ideal path is down to eat nippy. Components present in crisp like capsicum have inclination of bringing down yearning. It additionally expands generation of vitality, because of which control over weight is kept up.
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  9. MINT JUICE WITH HONEY: Taking 1 spoon of Mint Juice with 2 spoon Honey (natural honey only) empty stomach in the morning likewise helps in bringing down weight.
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  10. AVOID BANANA, NASEBERRY (SAPODILLA):  Vegetables and organic products likewise brings down calories, thus eat them an ever increasing amount. Keep away from banana, it builds fat. Drinking MINT TEA or GREEN TEA additionally helps in bringing down weight.
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  11. TOMATO, ONION: Eat tomato and onion serving of mixed greens putting dark pepper in it with sustenance. They give us vitamin C, vitamin A, vitamin K, Iron, Potassium, Lykopene and so forth they will fill our stomach soon and helps in controlling weight.
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    Drinking 250 gm of tomato squeeze day by day morning in the wake of wakening up for 2-3 months will likewise lessen lump out stomach soon
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  12. FASTING: If you are healthy 20 - 60 years in age, do one or two time fast e.g. Morning Fast on Monday, Wednesday, Friday etc...... (alternative days for first few months WITH LITTLE FRUIT JUICE, than after 2 - 3 months start water based fasting. (it is advisable to do fast under medical / naturopathy / yoga specialized / expert supervision).
    {if you are overweight and below 20 year or more than 60 year old than you necessarily need to contact Naturopathy Yoga Doctor / Consultant}
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    Do not fast if you are facing diabetes, tuberculosis, ulcers, cancer and/or other fatal accute/ chronic disease. [It is Highly advisable to do entire fasting - under naturopathy/ medical supervision].
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  13. Yoga: Bhastrika Pranayama, Nauli Kriya (Nauli Action- movement of stomach muscles), ushtra-asana, gomukh asana (after little practice).
  14. (It is highly advisable to do all Yogic Exercise(s) - only under Yoga Expert / Naturopathy / Naturopath - Supervision).
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  15. Mud (Soid) Therapy: apply common mud pack 15 - 20 times in a month. (mud / clay should be - any local clay/ mud/ soil - below 4 - 6 feet of the ground elvel, as this will be considered as clean and bacteria free soil, you can put this soil under sunlight for 1 - 2 days to avoid/ eleminate insect and other microbes accordingly, do not heat the soil).